IMS क्या है? दुकानदारों के लिए हर महीने का नया Accept/Reject
IMS एक मासिक चेकलिस्ट है: आपके GSTIN पर अपलोड हुए हर बिल के लिए आप कहते हैं — Accept, Reject या Pending। जो Accept किया, वही आपका ITC बनता है।
पहले GSTR-2B वैसा ही मिलता था जैसा सप्लायर भेजते थे। Invoice Management System ने रिमोट कंट्रोल आपके हाथ में दे दिया — और अक्टूबर 2025 की टैक्स अवधि से इसका इस्तेमाल ITC का अनिवार्य आधार है (संशोधित Section 38)। नई ताकत, नया काम।
तीनों बटन, दुकान की भाषा में
| कार्रवाई | मतलब | नतीजा | |---|---|---| | Accept | "हाँ, यह खरीद मेरी है, जानकारी सही है" | बिल 2B में → क्रेडिट मिलेगा | | Reject | "यह मेरी खरीद नहीं / गलत है" | 2B से बाहर; सप्लायर को दिखेगा | | Pending | "असली है, पर अभी नहीं" | रुका रहेगा; बाद में तय करें |
कोई कार्रवाई नहीं = अपने आप स्वीकृत। यही जाल है: लगता है IMS को अनदेखा कर सकते हैं, पर अनदेखा करने का मतलब है आपके GSTIN पर अपलोड कुछ भी — किसी ठग का फर्जी बिल भी — सीधे आपके क्रेडिट में। FY24-25 में ₹1.01 लाख करोड़ का फर्जी ITC पकड़ा गया; "अनजान बिल → Reject" की आदत कीमती है।
Accept से ज़्यादा ज़रूरी है Reject
सही बिल तो deemed acceptance से भी स्वीकृत हो जाते। असली ताकत Reject है:
- जिस फर्म से कभी खरीदा नहीं, उसका बिल? Reject — आपने किसी की फर्जी ITC चेन का हिस्सा बनने से मना कर दिया।
- डुप्लीकेट अपलोड? कॉपी Reject।
- रकम गलत? Reject करके सप्लायर से सही रिपोर्ट कराएँ।
और बीच के मामलों में Pending आपका बचाव है: माल रास्ते में, विवाद जारी, जाँच बाकी।
15 मिनट की मासिक आदत
- 11 से 13 तारीख के बीच IMS खोलें — सप्लायरों की GSTR-1 (11) के बाद, 2B (14) से पहले।
- हर बिल को अपने खरीद बिलों से मिलाएँ। जानी-पहचानी खरीद, सही जानकारी → Accept।
- अनजान या गलत → Reject। असली पर माल नहीं आया/विवाद → Pending।
- Pending की सूची हर महीने दोबारा देखें ताकि क्रेडिट चुपचाप समय-सीमा (वित्त वर्ष के बाद 30 नवंबर) से बाहर न हो जाए।
- 14 से पहले सब निपटा, तो 2B पहले से साफ निकलता है — मिलान औपचारिकता बन जाता है।
एक उदाहरण
देवी जनरल स्टोर, नवंबर: IMS में 31 बिल। 27 खरीद बिलों से मिले → Accept। 2 ऐसी फर्म के जिनसे कभी कुछ नहीं लिया → Reject (और फर्जी सप्लायर जाँच का नोट)। 1 सच्चा ऑर्डर अभी ट्रक में → Pending, दिसंबर में Accept। 1 में ₹1,200 की जगह ₹12,000 टैक्स → Reject, सप्लायर ने अगले महीने सही रिपोर्ट किया। उस महीने देवी का 2B ठीक वही था जो होना चाहिए।
GST Sathe यहाँ क्या करता है
31 बिलों को बिलों की दराज़ से मिलाना ठीक वही यांत्रिक काम है जो software को करना चाहिए। GST Sathe आपकी IMS कतार पढ़ता है, हर बिल को कैप्चर किए बिलों से मिलाता है, और कार्रवाई पहले से सुझा देता है — आपका मासिक IMS सेशन दो मिनट का रिव्यू बन जाता है। IMS फ़ीचर देखें →
स्रोत
- Section 38, CGST Act (संशोधित); GSTN IMS एडवाइज़री (अक्टूबर 2025 टैक्स अवधि से अनिवार्य आधार)
- Rule 60; DGGI/CBIC FY24-25 आँकड़े
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या IMS ज़रूरी है?+
हाँ — अक्टूबर 2025 की टैक्स अवधि से संशोधित Section 38 के तहत IMS कार्रवाई ही ITC का आधार है। जिस बिल पर कोई कार्रवाई नहीं होती, वह 2B बनते समय अपने आप स्वीकृत (deemed accepted) मान लिया जाता है।
Deemed acceptance का मतलब?+
आपने न Accept किया, न Reject, न Pending — तो 14 तारीख को 2B बनते समय बिल स्वीकृत मान लिया जाता है। सुविधाजनक लगता है, पर इसका मतलब है कि फर्जी बिल भी चुपचाप आपके क्रेडिट में घुस सकता है।
बिल Pending कब रखें?+
बिल असली है पर स्वीकारने की स्थिति नहीं — माल पहुँचा नहीं, क्वालिटी का विवाद है, या जाँच चल रही है। Pending बिल इस महीने के 2B से बाहर रहकर आगे बढ़ता है (ITC की समय-सीमा के भीतर)।
गलती से सही बिल Reject हो गया तो?+
उस अवधि का GSTR-3B फाइल होने से पहले एक्शन बदलकर 2B recompute कर सकते हैं; बाद में सप्लायर के दोबारा रिपोर्ट/संशोधन का रास्ता बचता है। झंझट से बचने के लिए 14 से पहले जाँच लें।
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